कार ने मोटरसाइकिल को मारी ठोकर, युवक हुआ घायल


अनूपपुर

अनूपपुर अमरकंटक मुख्य मार्ग के मध्य बैरीबांध में वेयर हाउस के पास अमरकंटक की ओर से अनूपपुर की ओर रही कार एमपी 52 डीसी 2365 के चालक ने अनूपपुर से सब्जी लेकर अपने गांव सकरा जा रहे 45 वर्षीय संतोष चौधरी पिता सुग्रीव चौधरी जो मोटरसाइकिल क्रमांक एमपी 18 एमडी 8222 को विपरीत दिशा से आकर ठोकर मार दी, जिससे संतोष बुरी तरह घायल हो गया जिसे जिला चिकित्सालय अनूपपुर ला कर प्रारंभिक उपचार करने बाद बेहतर उपचार हेतु मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर किया गया है, वही कार चालक कार स्थल पर छोड़कर मौके से फरार हो गया है। घटना की सूचना पर कोतवाली थाना अनूपपुर द्वारा कार चालक के विरुद्ध अपराध दर्ज करते हुए  फरार कार चालक की तलाश करने में जुटी हुई है।

अज्ञात कारणो से बाबा संतराम की मौत, पुलिस ने शुरू की जांच


अनूपपुर

जिले के अमरकंटक थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खाटी के बेलघाट में स्थित आश्रम में विगत कई वर्षों से रह रहे 36 वर्षीय बाबा संतराम पिता राम अभिलाष जो तेंदुआमोहनी जिला गोंडा़ उत्तरप्रदेश के मूल निवासी हैं। बेलघाट स्थित आश्रम में अज्ञात कारणों से मृत्यु हो जाने की सूचना पर अमरकंटक पुलिस द्वारा मृत बाबा के शव को अपनी अभिरक्षा में लेते हुए परिजनों को सूचना दी गई, परिजनों के आने की प्रतीक्षा में बाबा के शव को जिला चिकित्सालय अनूपपुर के शव फ्रीजर सुरक्षित में रखा गया, सुबह परिजनों के द्वारा बाबा की पहचान करने बाद पुलिस ने पंचनामा एवं ड्यूटी डॉक्टर से पी,एम,करा कर जांच प्रारंभ की  मृतक बाबा संतराम के पार्थिव शरीर को उनके बेलघाट स्थित आश्रम के समीप दफनाकर अंतिम संस्कार किए जाने का निर्णय परिजनों द्वारा लिया गया, बाबा संतराम की मृत्यु अज्ञात कारणों से होने पर पुलिस जांच में लगी हुई है।

जंगल की अवैध कटाई मामले में बीडगार्ड, डिप्टी रेंजर व उप वन क्षेत्रपाल को हुई नोटिस जारी 

जांच में हुआ खुलासा, सात माह बाद भी 77740 रुपए की नहीं हुई वसूली*


अनूपपुर

जिले के वन परिक्षेत्र कोतमा अंतर्गत ग्राम कोटमी में कुछ महीने पहले0 लगातार RF442 की शिकायत हुई थी, जिसके बाद जांच टीम द्वारा पक्षपात कर उन अधिकारियो के करनी पर भ्रष्टाचार में लीपापोती कर मामले को दबाने की प्रयास किया गया, जबकि वन भूमि में डिप्टी रेंजर बीडगार्ड परिक्षेत्र कोतमा अधिकारीयों के साठ गांठ से डिप्टी रेंजर बीडगार्ड के सह सहयोग से वन भूमि में अवैध अतिक्रमण हुआ था और वृक्षों की कटाई में संलिप्त पाया गया था, वन परिक्षेत्र अनूपपुर कोतमा के जांच में प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया था, जिसमे शिकायतकर्ता सहित ग्रामीणों असतुष्ट रहे और हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिए थे, हरी प्रसाद यादव ने वन मंडलाअधिकारी अनूपपुर दिनांक 20 फरवरी 2024 को शिकायत की थी जहा पर पूर्व वनमंडलाधिकारी अनूपपुर श्रद्धा पंद्रे के द्वारा तत्काल अपने सज्ञान में लेकर दिशा निर्देश देते हुए अपने मार्ग दर्शन में वन मण्डलधिकारी वन मंडल दक्षिण शहडोल स्पेशल टास्क फोर्स को जांच की जिम्मा सौंप कर जांच दिनांक 10 मार्च 2024 को कराई गई, जहा पर शहडोल टीम अधिकारी द्वारा जंगल को घूमकर देखा जिसमे कोटमी जंगल में 24 नग सराई के साल प्रजाति एव धुरवासिन जंगल के कुछ ही हिस्सो में 11 नग पेड़ो  की अवैध कटाई पाई गई जिन ठूठो में कोई हैमर तथा मौके स्थल में वनोपज की लकड़ी मौजूद नहीं मिला था, एसटीएफ जांच टीम जंगल में पहुंचकर जंगल जांच कर पोल खोल दी, सारी पोल बना गया 77 हजार साथ सौ चालीस रुपए की जांच में वृक्षो हानि पाई गई थी तथा कोटमी धुरवासीन जंगलों की वृक्षों की अवैध कटाई में हरी प्रसाद यादव की शिकायत को सही पाया गया, जिसमे तीनो अधिकारियो पर आरोप सिद्ध हुआ और अशोक कुमार निगम के विरुद्ध 23 हजार तीन सौ बाइस रुपए, विनोद कुमार मिश्रा के विरुद्ध 23 हजार तीन सौ बाइस रुपए, सोमपाल सिंह कुशराम के विरुद्ध इकतीस हजार छियानवे रुपए की दिनांक 11 अप्रैल 2024 को नोटिस ज़ारी हुआ, सूचना के अधिकार के तहत 23 सितंबर 2024 को जानकारी प्राप्त हुआ प्रार्थी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी की ग्राम कोटमी धुरवासिन जंगल की हुई नुकसानी वसूली आदेश की छाया प्रति की मांग की गई थी, लेकिन उसको न देकर 10 अक्टूबर 2024 को तीनो का जारी नोटिस की छाया प्रति सूचना के आधिकार से दिया गया, जिस पर पता चला की अभी तक वसूली का आदेश नही हुआ है और वही तीनो कर्मचारी जिनके पदस्थ रहने पर व्रक्षों की अवैध कटाई में संलिप्ता पाई गई, तीनो कर्मचारियों को सर्किल प्रभारी लतार डिप्टी रेंजर विनोद कुमार मिश्रा बीडगार्ड धुरवासिन सोमपाल सिंह उप वन क्षेत्रपाल अशोक कुमार निगम को आज भी उसी जगह पर तैनात है जिस जगह पर रह कर अवैध कटाई वन भूमि में भू माफियो को अवैध कब्जा दिलाने जैसे कार्यों को अंजाम दिया गया था और लगातार दे रहे है, आख़िर इतनी गंभीर मामले में आज सात महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक क्यों नहीं हुई वसूली का आदेश, आखिर किसके संरक्षण से तीनो कर्मचारी बच रहे है, वन विभाग के वरिष्ट अधिकारीयो पर सवाल खडा हो रहा है।

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