कलेक्टर साहब सुनिए सच का पैगाम, मुख्य मार्ग से ज्यादा खतरनाक स्टेशन के सामने शराब दुकान का संचालन
*सारा विरोध का खेल सिर्फ पत्रकार के निजी भवन में शराब दुकान संचालित करवाने के लिए*
अनूपपुर
जिले के अमलाई नगर में शराब दुकान हटने हटाने से उपजे विवाद मे यदि जन मानस की भूमिका या फिर वास्तविक तस्वीर की बात करें तो नगर का जनमानस ने लगभग 5 वर्ष पहले ही स्टेशन के सामने से शराब दुकान हटाने के लिए मोर्चा खोलकर अपना रुख साफ कर दिया था, नगर के स्थानीय पत्रकार कैलाश लालवानी द्वारा रेलवे स्टेशन के दूसरे छोर एकांत में संचालित शराब दुकान को जोर जबरदस्ती कर अपने निजी भवन में संचालित करने के इरादे एवं किराया लेने आर्थिक लाभ उठाने के स्वार्थ के लिए स्टेशन के मुख्य द्वार के स्थानांतरण कर शराब दुकान को संचालित करवाया गया था, जिस वजह से रोजाना राहगीरों से शराबियों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती थी, महिला यात्रियों आना जाना दुर्भर था, महिलाएं सुरक्षित नहीं थी, रेलवे स्टेशन के सामने अंधेरे का फायदा उठाकर शराबियों द्वारा महिलाओं से छेड़छाड़ करने के कई मामले आने लगे थे, बस्ती के बीच शराबियों का उत्पात काफी बढ़ गया था, इन्हीं सब बातों को गंभीरता से लेते हुए नगर के प्रबुद्ध जन तथा महिलाओं ने स्टेशन के सामने से शराब दुकान हटाने को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया था, यदि आबकारी विभाग के पुराने पन्ने पलटे जाएं तो यह जन आंदोलन जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में भी दर्ज मिलेगा, अब यदि वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो नगर की जनता का इस पूरे विवाद से कोई नहीं लेना नहीं, क्योंकि नगर की जनता स्थानिक पत्रकार कैलाश लालवानी की मनसा से भली-भांति परिचित है, क्षेत्रवासी जान चुके हैं, कि इनको अपने लाभ और निजी स्वार्थ के अलावा किसी बात से कोई लेने- देना नहीं है, जन सरोकार एवं जनहित की मुद्दों की बड़ी-बड़ी बात करने वाले पत्रकार का वास्तविक चेहरा कलेक्टर साहब कृपया पहचाने, तथाकथित इस पत्रकार के एक ही लक्ष्य किसी भी प्रकार छल कपट झूठ षडयंत्र पूर्वक अपने रसूख के दम पर जिला प्रशासन को गुमराह कर फिर से शराब दुकान स्टेशन के सामने अपने भवन में संचालित करवाना, ताकि शराब ठेकेदार से किराए के नाम पर हर माह मिलने एक मोटी राशि से महाशय वंचित न हो सके, एक बार ठगे जा चुके नगर के जनमानस का इस मामले से कोई सरोकार होता, या फिर हमारे वरिष्ठ पत्रकार पर जरा सा भी भरोसा होता है तो मुख्य मार्ग में शराब दुकान संचालित होने की विरोध में लगाए गए पंडाल में नगर के एक भी व्यक्ति की उपस्थिति होती, लेकिन ऐसा नहीं था चार-पांच पत्रकार बंधुओ तथा बुढार के 8 से 10 ईरानी चश्मा बेचने वाले की भीड़ दिखाने से नगर की जनता आक्रोशित है, आंदोलन की राह पर है, अखबार की सुर्ख़ियों के माध्यम से जिला प्रशासन को बताया जा रहा है, लेकिन जब स्थानांतरित शराब दुकान के सामने पंडाल लगाकर विरोध दर्ज करने में नगर का एक व्यक्ति नहीं पहुंचा और अपने मंसूबे में पानी फिरता देख एक नई पटकथा लिखी गई, जिसमें अपने रसूख और दबाव का इस्तेमाल करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष और कुछ पार्षदों को रोजी-रोटी का हवाला देकर अपने पक्ष में कर करते हुए इनसे पत्र लिखवाकर कलेक्टर साहब तथा जिला प्रशासन को गुमराह करने का काम किया जा गया है। यदि वास्तव में जिला प्रशासन यथा स्थिति अवगत होना चाहता है तो स्थानीय पत्रकार के बताए हुए चक्रव्यूह से बाहर निकले और यहां आमजन से पूछे, शराब दुकान मुख्य मार्ग में संचालित करने से ज्यादा खतरनाक रेलवे स्टेशन के सामने है, आम जनता की अगर माने तो यह नशे की पोटली बस्ती के बाहर कहीं एकांत में संचालित करवाना ही ठीक होगा। जिससे बस्ती में शांति का माहौल बना रहेगा और जनता चैन की नींद सो पाएगी।