महिला प्राचार्य ने नकल करवाने के नाम पर मांगे रुपए, नही देने पर छात्र का चपरासी से फोड़वा दिया सर
*सहायक आयुक्त ने नही सुनी पीड़ित की शिकायत, थाना में नही लिखी शिकायत, एसपी से हुई शिकायत*
अनूपपुर
जिले के आदिवासी अंचल पुष्पराजगढ़ में शिक्षा के मंदिर जहां पर शिक्षक के द्वारा छात्रों व छात्राओं ज्ञान का पाठ पढ़ाने का जिम्मा दिया गया है, वहाँ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पर विद्यालय के महिला प्राचार्य ने विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे का सर सिर्फ इसलिए फोड़वा कर लहू लुहान करवा दिया, क्यों कि वह नकल करने के लिए घर से पैसे लेकर नहीं आया था। जी हां आपको जानकर हैरानी होगी कि आज भी आदिवासी अंचल के विद्यालय में होने वाली परीक्षाओं में छात्रों को नकल करवा कर किस तरह उनका भविष्य बर्बाद किया जाता है। पहले तो विद्यालय में पूरे वर्ष छात्र छात्राओं को पढ़ाई के नाम पर समय वितीत कराया जाता है, फिर नकल के नाम पर बच्चो से हजारों रुपए कमाया जाता है। राजेंद्रग्राम थाने के ग्राम भर्रा टोला कि यह घटना बताई जा रही है, शासकीय प्राथमिक विद्यालय करौंदी मे कक्षा आठ में पढ़ने वाला 12 वर्षीय दीपक महरा से नकल करवाने के नाम पर 300 रुपये की मांग की गई थी, यह मांग कक्षा के सभी छात्रों से विद्यालय की प्राचार्य शेफाली मैडम द्वारा गई थी, जब दीपक नकल का पैसा लेकर नहीं आया तो विद्यालय की प्राचार्य आग बबूला हो गई और उसने चपरासी जिसका उप नाम गोयल हैं, बच्चे को धक्का देकर विद्यालय से भगा देने को कहा, जिस पर चपरासी द्वारा दीपक को धक्का देने पर वह लोहे के गेट से टकरा कर लहू लुहान हो गया, उसके बाद चपरासी द्वारा दीपक महरा बिना इलाज करवाए बच्चे के पिता अयोध्या प्रसाद की गैरमौजूदगी पर को उसी हालत में घर भिजवा दिया, सूचना पर बच्चे के पिता जब घर पहुँचा दीपक का सर खून बह रहा था, आनन फानन में पिता बच्चे का इलाज कराकर इस पूरे मामले की शिकायत लेकर थाना पुष्पराजगढ़ पहुँचा तो थाने में इसकी शिकायत न सुनकर वहाँ से भगा दिया गया। बच्चे का पिता बच्चे को लेकर पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, व सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग अनूपपुर शिकायत करने निकला तो किरर घाट पर विद्यालय की शिक्षिका शैफाली मैडम व उनके पति संदीप मिश्रा जनशिक्षक पीड़ित का रास्ता रोककर शिकायत न करने की बात कही, उनकी बात न मानने बच्चे के पिता को जान से मारने की धमकी दे डाली। पीड़ित पिता अनूपपुर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास पहुँचा तो घंटो इंतजार के बाद विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने कोई सुध नही ली, जब सहायक आयुक्त सरिता नायक आदिवासी विकास विभाग अनूपपुर कार्यालय से निकलकर कलेक्टर कार्यालय किसी कार्य से जाने लगी तो बच्चे का पिता मैडम के पीछे-पीछे चलकर न्याय की गुहार लगाता रहा लेकिन सहायक आयुक्त सरिता नायक पीड़ित की बात को न सुनते हुए कार्यालय से बाहर निकल गयी, इसी बीच कुछ पत्रकार इस मामले में सहायक आयुक्त से सवाल किया कि मैडम पीड़ित की शिकायत सुने बिना आप कैसे जा सकती है तो इस पर उन्होंने जबाब दिया कि मैं कलेक्ट्रेट मीटिंग में जा रही हूँ, मैने विद्यालय के प्राचार्य को बुलवाया है वो आ जाये फिर मैं देखती हूँ। पीड़ित 40 किलोमीटर दूर से शिकायत करने न्याय की गुहार लगाने आया था मगर सहायक आयुक्त मैडम ने एक न सुनी। पीड़ित पिता अयोध्या प्रसाद मायूस होकर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर से लिखित शिकायत करके विद्यालय के प्राचार्य व चपरासी पर कार्यवाही करने के लिए न्याय की गुहार लगाकर घर वापस चला गया। अब देखने वाली बात होगी कि एसपी साहब व सहायक आयुक्त इस मामले में कार्यवाही करते हैं या पूरा मामला ऐसे ही रफा दफा हो जाएगा।
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