माँ नर्मदा जी के उद्गम स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक के जैन मंदिर अमरकंटक में आग लगने पुरा जैन मंदिर का बाजार जलकर राख हो गया हैं, पीड़ित लोगों ने जैन मंदिर में जलें हुए दुकानो में जो नुकसान हुआ है मुआवजा की माँग की हैं। यह घटना वास्तव में अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। अमरकंटक जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल पर इस प्रकार की घटना प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठाती है। निम्न। अगर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने समय पर फोन उठाकर उचित कदम उठाए होते, तो शायद इस बड़ी क्षति से बचा जा सकता था। यह स्पष्ट रूप से उनकी गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
यदि प्रशासनिक कार्य संत मंडल या अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की चमचागिरी तक सीमित हो जाते हैं, तो जनता की समस्याओं की अनदेखी होती है। प्रशासन को निष्पक्ष और जवाबदेह होना चाहिए। जैन मंदिर बाजार में जिन दुकानदारों का नुकसान हुआ है, उन्हें सरकार से उचित मुआवजा मिलना चाहिए। इसके साथ ही, प्रभावित लोगों के पुनर्वास और व्यवसाय पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना बनाई जानी चाहिए।
यह भी आवश्यक है कि इस आग लगने के कारणों की गहराई से जांच की जाए। क्या यह दुर्घटना थी, लापरवाही का परिणाम था, या किसी साजिश का हिस्सा? अमरकंटक जैसे पवित्र और संवेदनशील स्थलों के लिए आग जैसी आपदाओं से निपटने के लिए एक मजबूत योजना और बेहतर संसाधन सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जन प्रतिनिधियों और नागरिकों को प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
और ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है ताकि भविष्य में प्रशासन को सचेत रहने की प्रेरणा मिले।