दबंग पब्लिक प्रवक्ता

अवैध रूप से भण्डारित 350 घन मीटर रेत का किया गया विनिष्टिकरण


शहडोल

कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देशन में तथा खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य के मार्गदर्शन मे आज खनिज विभाग द्वारा पुलिस विभाग के सहयोग से संयुक्त रूप से तहसील गोहपारू अंतर्गत ग्राम अतरिया मे तीन अलग-अलग स्थानों पर 350 घन मीटर खनिज रेत का अवैध भंडारण पाए जाने पर जेसीबी मशीन के माध्यम से मिट्टी मिलाकर विनिष्टिकरण किया गया। उक्त कार्यवाही खनि निरीक्षक किशोर भोन्डेकर, पवन डोंगरे, आकाश चौबे तथा सर्वेयर समयलाल गुप्ता के द्वारा पुलिस विभाग के सहयोग से किया गया। 

 इसी प्रकार ग्राम चुहिरी में खनिज रेत का अनधिकृत भण्डारण मे संलग्न होने पर वाहन को जब्त किया जाकर थाना गोहपारू में सुरक्षार्थ खड़ा कराया गया एवं खनिज नियमों के तहत कार्यवाही की जा रही है

विभाग द्वारा गोहपारू तहसील अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों पर खनिजों के अवैध उत्खनन,परिवहन एवम भण्डारण की सतत रूप से जांच की जा रही है।

निःशुल्क चिकित्सा शिविर निजी अस्पताल में मरीज भेजने का जरिया? एसईसीएल अस्पताल में लगे कैंप पर गंभीर सवाल 

*निजी अस्पताल बुलाने व कमीशनखोरी के आरोप*


अनूपपुर

एसईसीएल के कोतमा कॉलरी चिकित्सालय, भालूमाड़ा में आयोजित निःशुल्क सुपरस्पेशलिटी चिकित्सा परामर्श शिविर अब सवालों के घेरे में आ गया है। बिलासपुर के किम्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आयोजित इस शिविर का उद्देश्य मरीजों को बेहतर चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराना बताया गया था, लेकिन शिविर में पहुंचे कई लोगों के अनुभव और मौके पर सामने आई परिस्थितियां इसकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं

आरोप है कि बड़े-बड़े बैनर लगाकर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का प्रचार किया गया, जबकि मौके पर मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और पैर से संबंधित एक छोटी जांच मशीन की सुविधा दिखाई दी, कई मरीजों को विस्तृत जांच एवं उपचार के लिए बिलासपुर स्थित निजी अस्पताल आने की सलाह दी गई, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह शिविर वास्तव में मरीजों की सुविधा के लिए आयोजित किया गया था या निजी अस्पताल में मरीजों को भेजने का माध्यम बन रहा था।

शिविर के प्रचार बैनर के अनुसार किम्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी। डॉ. वाय रवि शेखर जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विशेषज्ञ, डॉ. सुधा राम न्यूरो एवं स्पाइन सर्जरी विशेषज्ञ, डॉ. अनिरुद्ध श्याम पल्मोनोलॉजिस्ट एवं छाती रोग विशेषज्ञ। बैनर में पेट, पित्ताशय, हर्निया, रीढ़ की समस्याओं, ब्रेन ट्यूमर, अस्थमा, सीओपीडी और अन्य गंभीर बीमारियों के परामर्श का उल्लेख था, लेकिन सवाल यह है कि इतने गंभीर रोगों के लिए आयोजित सुपरस्पेशलिटी शिविर में संबंधित जांच की सुविधाएं उपलब्ध नही थीं।

मिली जानकारी के अनुसार शिविर में लगभग 70 लोगों का पंजीयन किया गया आरोप है कि इनमें कई ऐसे मरीज भी शामिल थे, जो विशेष शिविर में भाग लेने नहीं, बल्कि प्रतिदिन की तरह एसईसीएल चिकित्सालय में अपना नियमित उपचार कराने आए थे।

 मुख्यमंत्री के आगमन पर फर्जी वाहनो का बिल, एक ही फर्म की पाँच अलग-अलग गाड़ियों के नाम पर पर भुगतान  


उमरिया

जनपद पंचायत पाली की ग्राम पंचायत धनवाही में देखने को मिला है, जहाँ ग्राम पंचायत की सरपंच छोटी बाई और सचिव ने मिलकर मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद के आगमन की आड़ में फर्जी वाहन बिलों का एक ऐसा जाल बुना है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है, एक ही फर्म, एक ही बैंक खाता, एक ही व्यक्ति और पाँच अलग-अलग गाड़ियों के नाम पर कुल 20,500 रुपये का भुगतान कर दिया गया है, और यह सब हुआ है पंचायती राज अधिनियम, वित्तीय नियमों और सरकारी प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए, प्राप्त पाँचों बिलों की गहनता से जांच करने पर यह पूरा मामला सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश और सरकारी धन के गबन की श्रेणी में आता है।

मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब पंचायत के दस्तावेज सामने आए, सभी पाँचों बिल दिव्या यादव ग्राम सेमरिया जिला उमरिया नामक फर्म के लेटरहेड पर बने हैं, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा है नोट-हमारे यहाँ बोलेरो गाड़ी किराये पर उपलब्ध है, मोबाइल नंबर 7828600685, बैंक खाता नंबर 580402010024554 यूनियन बैंक ऑफ इंडिया उमरिया और IFSC कोड UBIN0558044 सभी बिलों पर एक जैसा है, जो यह साबित करता है कि यह एक ही व्यक्ति की फर्म है, अब जरा बिलों की तारीख और गाड़ियों के नंबर पर गौर कीजिए, पहला बिल क्रमांक 44 दिनांक 25 अक्टूबर 2022 को जारी किया गया है, जिसमें गाड़ी नंबर MP 17 ZA 1482 पिकअप गाड़ी के नाम पर 4900 रुपये का भुगतान दिखाया गया है और विवरण में खनिज ले जाना जैसा कुछ लिखा है, दूसरा बिल क्रमांक 42 दिनांक 30 नवंबर 2022 का है, जिसमें गाड़ी नंबर MP 54 T 0666 बोलेरो के नाम पर 4700 रुपये का भुगतान, तीसरा बिल क्रमांक 43 दिनांक 23 दिसंबर 2022 का है, जिसमें गाड़ी नंबर MP 54 Z 1817 बुलेरो के नाम पर मुख्यमंत्री आगमन के नाम पर 3000 रुपये का भुगतान, चौथा बिल क्रमांक 40 दिनांक 29 दिसंबर का है, जिसमें गाड़ी नंबर MP 54 T 1061 बोलेरो के नाम पर मुख्यमंत्री आगमन के नाम पर ही 3000 रुपये का भुगतान और पाँचवां बिल क्रमांक 41 दिनांक 03 दिसंबर 2024 का है, जिसमें गाड़ी नंबर MP 54 BN 4726 बुलेरो के नाम पर मुख्यमंत्री आगमन के नाम पर ही 4900 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है, यानी महज दो महीने के भीतर अक्टूबर से दिसंबर 2022 के बीच ही चार अलग-अलग गाड़ियों के नाम पर 15,600 रुपये और फिर दो साल बाद 2024 में फिर से उसी फर्म की पाँचवीं गाड़ी के नाम पर 4900 रुपये, कुल मिलाकर 20,500 रुपये का भुगतान ग्राम पंचायत धनवाही के खाते से किया गया है और इन सभी पाँचों बिलों पर ग्राम पंचायत धनवाही की सरपंच श्रीमती छोटी बाई और सचिव के हस्ताक्षर और सील लगी हुई है, बिना उनके हस्ताक्षर के पंचायत से एक रुपया भी नहीं निकल सकता, इसलिए इस पूरे घोटाले की सीधी जिम्मेदारी सरपंच छोटी बाई और सचिव की ही बनती है।

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