दबंग पब्लिक प्रवक्ता

महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़ना निंदनीय, दिल्ली जंतर-मंतर छात्र आंदोलन का समर्थन

*प्रगतिशील लेखक संघ का राज्य सम्मेलन इंदौर में*


इंदौर

प्रगतिशील लेखक संघ का राज्य सम्मेलन अक्टूबर माह में इंदौर में आयोजित होगा। इस सम्मेलन की तैयारी के सिलसिले में प्रलेसं की इंदौर इकाई की एक बैठक अभिनव कला समाज परिसर में संपन्न हुई।

             बैठक में राज्य सम्मेलन के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा की गई। सम्मेलन हेतु स्वागत समिति, भोजन एवं आवास व्यवस्था के बारे में विचार-विमर्श हुआ। 

वरिष्ठ शिक्षिका, भारतीय महिला फेडरेशन की वरिष्ठ नेत्री एवं प्रलेस तथा इप्टा से दशकों से जुड़ी रही सुश्री शैला शिंत्रे को स्वागत समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

           इस अवसर पर नए लेखकों को प्रलेसं इकाई की सदस्यता प्रदान की गई। वरिष्ठ कवयित्री सारिका श्रीवास्तव की कविताओं का अशोक दुबे द्वारा बनाए गए पोस्टरों का विमोचन हुआ।

            बैठक में विगत कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर में जारी विद्यार्थियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए उनके संसद मार्च पर की गई पुलिसिया दमनात्मक कार्रवाई की निंदा की गई। वक्ताओं ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से मांग की कि वह विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करे और उनकी मांगों को स्वीकार करे।

              बैठक में बंगाल के रानीगंज में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति को ध्वस्त करने की निंदा करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया गया।

              उल्लेखनीय है कि राहुल सांकृत्यायन की 9 फीट ऊँची प्रतिमा उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर रानीगंज में स्थापित की गई थी। बंगाल में भाजपा सरकार के संरक्षण प्राप्त उपद्रवियों ने मूर्ति को तोड़ने की कायराना हरकत की है। ये तत्व राहुल जी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान और हिंदी साहित्य में उनके लेखन को धूमिल करना चाहते हैं। वक्ताओं ने कहा कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन की याद में बनी इस बौद्धिक विरासत को सोची-समझी साजिश के तहत तोड़ा गया है।

            बैठक में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी, राज्य सचिव मंडल सदस्य सारिका श्रीवास्तव, इकाई सचिव हरनाम सिंह, कोषाध्यक्ष विवेक मेहता, इप्टा के प्रमोद बागड़ी, अशोक दुबे के अलावा फादर पायस लाकरा, विकास, विवेक, अभय लोधी, रवि अहिरवार, नीपा पंड्या तथा निर्मल जैन ने अपने विचार रखे।

ट्रक ने बाइक सवार को मारी टक्कर, युवक की हुई मौत, ग्रामीणों व परिजनों का फूटा गुस्सा, सड़क किया जाम


शहडोल 

जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत बेम्हौरी बस स्टैंड के पास कोयला परिवहन में लगी हाइवा की टक्कर से 20 वर्षीय युवक राजेंद्र कोल की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और कई घंटों तक सड़क जाम रही। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की तेज रफ्तार लगातार लोगों की जान ले रही है।

हाइवा क्रमांक CG 10 BL 9095 दामिनी कोल माइंस से कोयला लेकर संगमा कोल साइडिंग जा रही थी। बेम्हौरी हनुमान मंदिर के सामने बाइक सवार राजेंद्र कोल उसकी चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई और शव हाइवा के नीचे फंस गया।

हादसे के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क जाम कर एसईसीएल के महाप्रबंधक एवं उपक्षेत्रीय प्रबंधक को मौके पर बुलाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा रहा है। काफी समझाइश के बाद शाम को शव बाहर निकाला गया।

ग्रामीणों का कहना है कि कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की गति, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की जरूरत है। लोगों ने मांग की है कि दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

शिक्षा से दूर बच्चे, नौनिहालों से कराया जा रहा टीका-चंदन,  मंदिर परिसर में संदिग्ध लोगों की सक्रियता पर उठे सवाल


अनूपपुर

पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित मां नर्मदा मंदिर परिसर, कोटितीर्थ कुंड एवं रामघाट क्षेत्र में इन दिनों एक चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। यहां मासूम बच्चों से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर चंदन-टीका लगवाकर उनसे राशि लेने का कार्य कराया जा रहा है। बच्चों के हाथों में चंदन के डिब्बे, ब्रश तथा 'नर्मदे हर', 'ॐ' और 'महाकाल' अंकित सांचे दिखाई देते हैं। श्रद्धालुओं को रोककर उनके माथे पर टीका लगाया जाता है और इसके बाद उनसे स्वेच्छा अथवा अपेक्षित रूप से धनराशि ली जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन नन्हे हाथों में इस उम्र में किताबें, कॉपियां और स्कूल का बस्ता होना चाहिए, वे हाथ दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच टीका-चंदन लगाने के कार्य में व्यस्त नजर आते हैं। उनका आरोप है कि कुछ अभिभावक तात्कालिक आर्थिक लाभ के लालच में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के बजाय इस कार्य में लगा देते हैं। परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य भी संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस कार्य से प्रतिदिन लगभग 200 से 300 रुपये तक की आय हो जाती है। इसी कारण कई बच्चे सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में इसी गतिविधि में लगे रहते हैं। सामाजिक रूप से यह स्थिति न केवल बाल शिक्षा के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि बाल संरक्षण और बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी संकेत करती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में कुछ बाहरी एवं संदिग्ध व्यक्ति भी इसी प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हैं। इनकी पहचान, सत्यापन और उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह स्थिति सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय मानी जा रही है।

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