दबंग पब्लिक प्रवक्ता

डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही युवती से 10 लाख ऑनलाइन ठगी, पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला किया दर्ज


शहडोल

खैरहा थाना क्षेत्र में डेंटल डॉक्टर की पढ़ाई कर रही एक युवती से टेलीग्राम ग्रुप के जरिए 10 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। युवती ने पुलिस को शिकायत देकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार पीड़ित युवती डेंटल डॉक्टर की पढ़ाई कर रही है। उसके पिता कॉलरी में कर्मचारी हैं। बताया गया कि बेटी के विवाह के लिए कुछ लोन भी लिया गया था। इसी दौरान युवती टेलीग्राम ऐप पर एक ग्रुप से जुड़ी, जहां निवेश के नाम पर रकम दोगुनी करने का झांसा दिया जा रहा था। बताया जा रहा है कि युवती ने 31 जुलाई से इस ग्रुप में बताए गए बैंक खातों में धीरे-धीरे रकम ट्रांसफर करना शुरू किया। करीब दो सप्ताह के दौरान उसने 10 लाख रुपये से अधिक की राशि बताए गए खाते में जमा कर दी। शुरुआत में उसे रकम बढ़ने और वापस मिलने का भरोसा दिलाया गया, लेकिन जब निवेश की गई राशि उसके खाते में वापस नहीं आई तो उसने टेलीग्राम ग्रुप में दिए गए नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया।

कई प्रयासों के बावजूद आरोपियों से संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद टेलीग्राम ग्रुप भी बंद हो गया। तब युवती को अपने साथ हुई ठगी का पता चला और उसने खैरहा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि ठगी की रकम से जुड़े कुछ लेनदेन मुंबई और बेंगलुरु के खातों से हुए हैं। पुलिस अब बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी जुटाकर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

एएसआई की घर पर संदिग्ध अवस्था मे मिला शव, हार्ट अटैक से मौत होने की आशंका, पुलिस जांच में जुटी


शहडोल

कोतवाली थाने में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक कैलाश मिश्रा उम्र 60 पुलिस लाइन स्थित सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह डायल-112 में ड्यूटी कर रहे थे। सुबह ड्यूटी पर नहीं पहुंचने और फोन रिसीव नहीं करने पर पुलिसकर्मी उनके आवास पहुंचे, जहां वह बिस्तर पर मृत अवस्था में मिले। 

कैलाश मिश्रा पुलिस लाइन न्यू कॉलोनी के बी ब्लॉक स्थित कमरा नंबर 13 में अकेले रहते थे। बुधवार देर शाम ड्यूटी खत्म करने के बाद वह अपने सरकारी आवास चले गए थे। गुरुवार तड़के उनके सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद उन्होंने डायल-112 को बुलाया और जिला अस्पताल पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार और दवा लेने के बाद वह वापस घर लौट आए थे।

सुबह डायल-112 में उनकी ड्यूटी शुरू होने का समय होने पर पायलट ने मोबाइल फोन से संपर्क किया, लेकिन कई बार फोन करने के बावजूद कैलाश मिश्रा ने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद पायलट ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। सूचना मिलने पर कोतवाली थाना प्रभारी रावेंद्र तिवारी पुलिस टीम के साथ पुलिस लाइन स्थित उनके आवास पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा खोलकर देखा गया तो कैलाश मिश्रा बिस्तर पर मृत अवस्था में पड़े मिले। पुलिस ने अधिकारियों को घटना की सूचना देने के साथ उनके परिजनों को भी जानकारी दी। 

6 दिन से डायलिसिस मशीन ‘बीमार’, मरीजों की जिंदगी बेहाल, मरम्मत-मेंटेनेंस खर्च की जांच की उठी मांग


अनूपपुर

जिला चिकित्सालय अनूपपुर में डायलिसिस मशीन पिछले करीब एक सप्ताह से खराब होने के कारण किडनी रोगियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नियमित डायलिसिस पर निर्भर मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। मशीन बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों अथवा अन्य स्थानों पर डायलिसिस कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है।मरीजों के परिजनों का कहना है कि मशीन खराब हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उसे दुरुस्त नहीं कराया जा सका है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए डायलिसिस समय पर होना जीवनरक्षक आवश्यकता है। ऐसे में जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में यह सुविधा लंबे समय तक बाधित रहना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

डायलिसिस मशीन जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा के लगातार बंद रहने को लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि जब छह-सात दिन में एक खराब मशीन को ठीक नहीं कराया जा सका, तो गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार और आवश्यक सुविधाएं कैसे मिल पाएंगी।

जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. परस्ते की कार्यप्रणाली को लेकर भी मरीजों के परिजनों में नाराजगी है। उनका कहना है कि इतने गंभीर विषय पर तत्काल पहल और वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता थी। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि डायलिसिस मशीन जल्द से जल्द चालू कराई जाए, ताकि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकने और अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाने से राहत मिल सके।

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