दबंग पब्लिक प्रवक्ता

2 वर्ष की प्रति नियुक्ति, 6 साल बाद जागा प्रशासन, कर्मचारियों की मांगी जानकारी, पूरे संभाग में हुआ है खेल

*आदिवासी विभाग पर उठ रहे हैं सवाल, किस पर होगी कार्यवाही*


उमरिया

आदिवासी विकास विभाग में स्कूल शिक्षा विभाग  के शिक्षकों की 2 साल की प्रतिनियुक्ति को 6 साल तक खींचने का मामला उजागर होते ही संभागीय उपायुक्त आदिवासी विभाग शहडोल हरकत में आ गया  है। संभागीय उपायुक्त ने पूरे शहडोल संभाग से प्रतिनियुक्त कर्मचारियों की कुंडली तलब कर ली है।

*2019 में 2 साल की प्रतिनियुक्ति , 2026 तक वही डेरा*

कार्यालय आयुक्त आदिवासी विकास भोपाल ने आदेश क्रमांक 23262 दिनांक 24.8.2019 से स्कूल शिक्षा विभाग के उमरिया जिले के शिक्षा विभाग के शिक्षकों को 2 वर्ष की प्रतिनियुक्ति कर आदिम जाति कल्याण विभाग में पर भेजा गया  था। 

इसी आदेश के साथ जारी *पत्र क्रमांक 23263* में साफ हिदायत थी - _"2 वर्ष बाद स्थानांतरण नीति के अनुसार मूल विभाग में पदांकन किया जाए।"यानी 2021 में ही इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से वापसी हो जानी थी।लेकिन हकीकत उल्टी है। 2 साल की प्रतिनियुक्ति को मानो सभी ने  "स्थाई सेटिंग" बना कर रख दिया  गया।

*उमरिया की तस्वीर आई सामने*

फिलहाल जो जानकारी मिली है उसके अनुसार उमरिया जिले के 9 शिक्षक आज भी स्कूल शिक्षा विभाग के  स्कूलों में पदस्थ थे, जिनमें निर्मला सिंह- हायर सेकेण्डरी निपनिया, राजेश कुमार मिश्रा- माध्यमिक शाला खालेकठाई, अजीत सिंह उईके - माध्यमिक शाला  सेहरा टोला, जानकी सलाम  माध्यमिक शाला करसरा, आभा सिंह  माध्यमिक शाला सेमरा, जी श्यामा राव माध्यमिक शाला  नौरोजाबाद, नीरज द्विवेदी प्राथमिक शाला  देवगवांखुर्द, जयभान श्याम हायर सेकेण्डरी विद्यालय घोघरी , रजनी सिंह प्राथमिक शाला  डोडगवां से प्रतिनियुक्ति आदेश के माध्यम से आदिम जाति विकास विभाग पाली की संभाग के आसपास की विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति आदेश के बहाने पिछले छ: साल से जमी हुई है। प्रतिनियुक्ति में आये सभी शिक्षकों ने  मुख्य मार्ग से लगे स्कूलों में पदस्थ होकर "ड्यूटी पका" रहे हैं। विभाग की वेबसाइट पर इनके पद आज भी "रिक्त" दिख रहे हैं, जिससे नई पदस्थापना में भारी विसंगति पैदा हो रही है। कहीं स्कूल शिक्षक विहीन हैं तो कहीं सरप्लस।

*शहडोल-अनूपपुर का ब्यौरा अभी छिपा*

याद रहे, ये तो सिर्फ उमरिया जिले की तस्वीर है। पूरे संभाग के शहडोल और अनूपपुर जिले में कितने शिक्षक इसी तरह प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं, इसका खुलासा अभी होना बाकी है।

इसी को लेकर संभागीय उपायुक्त *जे.पी. यादव* ने पत्र क्रमांक *860 दिनांक 3.8.2026* जारी कर तीनों जिलों के सहायक आयुक्तों से 3 दिन में 13 कॉलम का पूरा ब्यौरा मांगा है। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को भी तत्काल जानकारी भेजने के निर्देश हैं।

*अब तय होगी जिम्मेदारी*

2019 के आदेश में अवधि और वापसी दोनों स्पष्ट थे। बावजूद इसके 6 साल तक किसी ने सुध नहीं ली। अब संभाग स्तरीय जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने शिक्षक नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर हैं और इस लापरवाही के लिए किस पर गाज गिरती है।

जनादेश का हुआ अपमान, पार्षद चुनाव में जनता ने नकारा, हारे हुए प्रत्याशी को बना दिये एल्डरमैन, संगठन की कार्यशैली पर सवाल


अनूपपुर 

लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि माना जाता है। एक सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान यही है कि वह जनादेश का सम्मान करते हुए अपनी राजनीति को जन-सेवा के प्रति समर्पित रखे। लेकिन आज के दौर में नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं नैतिक मूल्यों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं। ऐसा ही एक ताजा और विवादित मामला नगर परिषद बरगवां से सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता संगठन ने जनता द्वारा पूरी तरह नकारे जा चुके नेताओं को पिछले दरवाजे से एंट्री दे दी है।

हाल ही में घोषित हुए मनोनीत पार्षदों की सूची के बाद क्षेत्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस सूची में मुख्य रूप से उन चेहरों को शामिल किया गया है, जो वार्ड पार्षद का चुनाव बुरी तरह हार चुके थे। इसमें बड़ा नाम संदीप पुरी का है कांग्रेस की अर्चना यादव से जो वार्ड सदस्य का चुनाव हारकर मैदान से बाहर हो गया था। वहीं दूसरा प्रमुख नाम अजय सिंह का है, जिन्हें संजय नगर की जनता ने पूरी तरह नकार दिया था।

अब स्थानीय जनता और राजनीतिक गलियारों में यह गंभीर सवाल उठ रहा है कि जब जनता ने इन नेताओं को एक बार पूरी तरह अस्वीकार कर दिया, तो फिर संगठन ने इन्हें मनोनीत पार्षद बनाकर पिछले दरवाजे से नगर परिषद में प्रवेश क्यों कराया? क्या यह सीधे तौर पर जनता के फैसले और लोकतंत्र का अपमान नहीं है?

इस फैसले से भाजपा के उन निष्ठावान कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं में भारी असंतोष और निराशा है, जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि संगठन को ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहिए था, जो चुनाव के वक्त सच्चे सिपाही की तरह पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए तन, मन और धन से जुटे रहते हैं। हारे हुए प्रत्याशियो को यदि  संगठन को उपकृत करना ही था  तो नेताओं की योग्यता अनुसार संगठन के किसी दायित्व की जिम्मेदारी सौंप दी तो दूसरे दल से आए हुए इन नेताओं का भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति से परिचय तो हो जाता है।

अंधविश्वास में महिला की हुई थी हत्या, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करके भेजा जेल


अनूपपुर

जैतहरी थाना क्षेत्र की वेंकटनगर पुलिस चौकी से 16 किलोमीटर दूर स्थित केरहा भेलमा गांव में 65 वर्षीय रामबाई गोंड की हत्या के मामले का पुलिस ने मंगलवार को खुलासा करते हुए मृतका के दो भतीजों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

प्रारंभिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा था, लेकिन आरोपियों से पूछताछ में हत्या के पीछे अंधविश्वास की वजह सामने आई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद 35 वर्षीय फूल सिंह गोंड और 25 वर्षीय सुरेश सिंह गोंड के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1), 3 और 5 के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस ने बताया कि मृतका रामबाई के पति सहित परिवार के तीन भाइयों में से एक की मौत वर्ष 2021, दूसरे की वर्ष 2025 और तीसरे की लगभग एक माह पहले हुई थी। आरोपियों में एक दूसरे भाई का पुत्र और दूसरा तीसरे भाई का पुत्र है। परिवार के बीच पहले से जमीन विवाद भी चल रहा था। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी अंधविश्वास के शिकार थे। उनका मानना था कि रामबाई घर में पूजा करती थीं और जो भी कहती थीं, वह सच हो जाता था। आरोपियों के अनुसार, रामबाई ने पहले दोनों देवरों की मृत्यु की बात कही थी और बाद में उनकी पत्नियों के बीमार रहने से उन्हें भय सताने लगा कि अब उनकी पत्नियों और फिर उनकी भी मौत हो जाएगी।

पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह रामबाई धान की रोपाई के लिए घर से निकल रही थीं। तभी दोनों भतीजों ने उनसे कथित तौर पर जादू-टोना हटाने की बात कही। रामबाई द्वारा इनकार करने पर दोनों ने गुस्से में उनकी पिटाई कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को घर के आंगन में छोड़कर दरवाजा बंद जैसा कर वहां से चले गए।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget