दबंग पब्लिक प्रवक्ता

खड़े ट्रक से टकराई बाइक, युवक की हुई मौत, कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तीन घायल


अनूपपुर

राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर फुनगा चौकी क्षेत्र अंतर्गत रविवार-सोमवार की दरमियानी रात दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाएं हुईं। पहली घटना में सड़क किनारे बिना संकेतक लाइट के खड़े डंपर से बाइक टकराने के कारण 27 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के दौरान मौत हो गई। वहीं मौके से ट्रक चालक वाहन छोड़ कर फरार हो गया हैं। दूसरी घटना में एक कार अनियंत्रित होकर सड़क से दूर जा पहुंची। कार में सवार तीन लोग घायल हुए हैं, जिनका मेडिकल कॉलेज में उपचार जारी है।

फुनगा चौकी प्रभारी सोने सिंह परस्ते ने बताया कि 27 वर्षीय प्रहलाद साहू पुत्र गया प्रसाद साहू, निवासी बदरा गैरेज में काम करने के बाद कोतमा की ओर से लौट रहा था। इसी दौरान वह फुनगा और पयारी गांव में दुर्गा प्रतिमाओं के दर्शन करने जा रहा था। रास्ते में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के किनारे डंपर क्रमांक सीजी 10 बीएन 0136 खड़ा था। डंपर पर कोई संकेतक लाइट नहीं जल रही थी। अंधेरे के कारण बाइक चालक सड़क किनारे खड़े डंपर को देख नहीं पाया और पीछे से उसमें जा टकराया। टक्कर इतनी गंभीर थी कि युवक घायल हो गया।

घटना के बाद आसपास से गुजर रहे लोगों ने फोन के माध्यम से फुनगा चौकी पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और डंपर के नीचे फंसे युवक को बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फुनगा पहुंचाया। हालांकि, उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

इसी रात राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर एक अन्य सड़क दुर्घटना में कार चालक को झपकी लगने से कार से नियंत्रित खो दिया और अनियंत्रित होकर एक पेड से जा टकराई जिससे सड़क से दूर जा पहुंची। कार में सवार तीन लोग घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। सड़क किनारे खड़े वाहन से हो रहा है हादसा।

लगातार हुई इन दुर्घटनाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और संकेतक लाइटों की आवश्यकता व यातायात पुलिस अनूपपुर की लापरवाही को फिर से उजागर किया है।

रेलवे कोल यार्ड के नाम पर खेतों का सीना छलनी, हजारों डंपर अवैध उत्खनन का आरोप, 15 फीट के खोद दिए गड्ढे

*शासन को लाखों का नुकसान, खनिज, राजस्व व रेलवे की भूमिका पर भी सवाल*


उमरिया

जनपद पंचायत पाली के ग्राम पंचायत खोलखम्हरा की छाती पर जेसीबी और पोकलेन मशीनें दिन-रात चलाकर हजारों डंपर मिट्टी निकालकर बांधवबारा रेलवे स्टेशन में बन रहे कोल यार्ड में खपाए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना वैध अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना ट्रांजिट परमिट के यह पूरा कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है।

आरोप है कि ठेकेदारों ने निजी खेतों के साथ-साथ शासकीय जमीन को भी नहीं बख्शा। लालच में आकर कुछ खातेदारों की जमीन से मिट्टी इस कदर निकाली गई है कि खेतों में 10 से 15 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो अब तालाब जैसे दिखते हैं। एक बार गहरी खुदाई के बाद वह जमीन हमेशा के लिए बंजर और खेती के अयोग्य हो जाएगी। यह सिर्फ राजस्व चोरी नहीं, बल्कि अन्नदाता की जमीन और पर्यावरण पर सीधा हमला है।

मिट्टी कहाँ से आ रही है, इसका वैध स्रोत, खदान की अनुमति, रॉयल्टी पर्ची, टीपी और परिवहन दस्तावेज कहाँ हैं? रेलवे के टेंडर अनुबंध में साफ लिखा है कि ठेकेदार को हर ट्रिप मिट्टी का वैध रॉयल्टी पेड दस्तावेज DRM कार्यालय में जमा करना होगा, बिना रॉयल्टी के एक भी डंपर साइट में खाली नहीं हो सकता। फिर सवाल है कि बिलासपुर मंडल के इंजीनियरिंग विभाग और आरपीएफ की नाक के नीचे हजारों अवैध डंपर कैसे खप गए? क्या रेलवे के इंजीनियरों ने आंख मूंदकर बिल पास कर दिए? यदि ठेकेदार के पास एक भी वैध कागज नहीं है तो यह मिट्टी नहीं, बल्कि शासन का खजाना लूटकर रेलवे यार्ड में पाटा जा रहा है और रेलवे भी इस लूट में बराबर का भागीदार है।।

इस पूरे मामले में खनिज, राजस्व और रेलवे निर्माण एजेंसी की मिलीभगत या घोर लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता। आखिर बिना प्रशासन की आंख मूंदे इतने बड़े पैमाने पर हजारों डंपरों का काफिला दिनदहाड़े कैसे चल सकता है? क्यों आज तक मौके का पंचनामा नहीं बनाया गया, कितनी घन मीटर मिट्टी निकली, जमीन किसकी है, अनुमति किसके नाम है - इसकी जांच क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों की मांग है कि कलेक्टर उमरिया और रेल महाप्रबंधक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर,  तत्काल खनिज, राजस्व और रेलवे विजिलेंस की संयुक्त टीम से खोलखम्हरा और बांधवबारा साइड का मौका मुआयना कराएं, सैटेलाइट इमेज, मशीनों के जीपीएस और डंपरों की गिनती से वास्तविक मात्रा निकालें और अवैध पाए जाने पर न सिर्फ लाखों की रॉयल्टी वसूली और जुर्माना करें, बल्कि मिट्टी चोरी में लगी जेसीबी, पोकलेन और डंपरों को जब्त कर ठेकेदार और सप्लायर पर FIR दर्ज कर रेलवे ठेके को ब्लैकलिस्ट किया जाए।

पेयजल व्यवस्था बदहाल, लाखों की टंकी फिर भी हैंडपंप पर निर्भर महिलाएं, सोन नदी में नाव लेने जा रहा युवक डूबा


उमरिया

पाली विकास खंड की ग्राम पंचायत गिंजरी की पेयजल व्यवस्था पिछले कई महीनों से ठप्प पड़ी है। शासन की नल-जल योजना कागजों में हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा करती है, गांव में लाखों की लागत से ऊंची पानी की टंकी भी खड़ी कर दी गई है, लेकिन हकीकत यह है कि पूरा गांव आज भी नदी और हैण्डपम्प के भरोसे जी रहा है।

एक तस्वीर इस हकीकत को साफ-साफ बयान कर रही है। हैंडपंप के चारों ओर महिलाओं की कतार लगी है। एक महिला हैंडपंप चला रही है, दूसरी बाल्टी भर रही है, तीसरी बर्तन धो रही है और बाकी महिलाएं अपनी बारी आने का इंतजार कर रही हैं। पीछे कच्चा मैदान, पुराने मकान और सूखा माहौल है, लेकिन महिलाओं का ध्यान सिर्फ एक ही चीज पर है - बूंद-बूंद पानी। एक बाल्टी भरते ही दूसरी बाल्टी के लिए फिर से कतार में लगना पड़ता है। घर तक पानी पहुंचाने के लिए महिलाओं को दिन में कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

ऊंची पानी की टंकी खड़ी है। ढांचा तैयार है, पाइप और सीढ़ियां लगी हैं, लेकिन उस टंकी से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। नल लगे हैं, पाइपलाइन का दावा है, पर नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं आती। नतीजा यह है कि लाखों रुपये की टंकी गांव के बीच शोपीस बनकर रह गई है, और ग्रामीण आज भी हैंडपंप पर निर्भर हैं। एक तरफ टंकी खड़ी है, दूसरी तरफ महिलाएं हैंडपंप से बाल्टी-बाल्टी पानी भरने को मजबूर हैं।

सोन नदी में नाव लेने जा रहा युवक डूबा


शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र में सोन नदी पार करते समय एक युवक गहरे पानी में डूबकर लापता हो गया। युवक नदी के दूसरी ओर खड़ी नाव को लेने के लिए तैरकर जा रहा था, इसी दौरान वह गहरे पानी में समा गया। घटना के बाद नदी किनारे मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाश शुरू की लेकिन कई घंटे बीतने के बाद भी युवक का पता नहीं चल सका।

लापता युवक की पहचान खुसरिया निवासी दीवाना सिंह गोंड 25 वर्ष पिता रामचरण के रूप में हुई है। उसका गांव बाणसागर डूब क्षेत्र में आता है, जिसके कारण ग्रामीणों को सोन नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। बताया गया कि दीवाना सिंह गांव के लोगों को नाव से नदी पार कराने में मदद करता था। नाव गांव के एक केवट की बताई जा रही है।

युवक ने सुबह नाव की मदद से अपने घर के लोगों को नदी पार कराई थी। इसके बाद कुछ लोग नाव को नदी के दूसरी ओर ले गए और वहीं छोड़ दिया। दोपहर में गांव के ही कुछ अन्य लोगों को नदी पार जाना था। नाव दूसरी ओर खड़ी होने के कारण दीवाना सिंह उसे लेने के लिए नदी में उतर गया। उसने एक किनारे से तैरकर दूसरे किनारे तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही गहरे पानी में डूब गया।

घटना के समय नदी किनारे मौजूद लोगों ने युवक को डूबते देखा और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम युवक की तलाश में जुटी हुई है। 

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