दबंग पब्लिक प्रवक्ता

ना तुम जीते, ना हम हारे, सुलह व सहमति से नेशनल लोक अदालत में निपटे 1942 प्रकरण, 112,760,667/-रूपये के अवॉर्ड पारित


छिंदवाड़ा

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार परस्पर समझौते के आधार पर आमजन को त्वरित एवं सुलभ न्याय दिये जाने के उद्देश्य से दिनांक 12 सितम्बर-2026 की साल  की तीसरी नेशनल लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय छिंदवाड़ा तथा तहसील न्यायालय परासिया, चौरई, पांढुर्णा, सौंसर, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा, हर्रई, तामिया में सुशांत हुद्दार, प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण छिन्दवाड़ा के कुशल नेतृत्व में किया गया। नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण छिंदवाडा के द्वारा अन्य न्यायाधीशगणों, अधिवक्ता संघ के सदस्यों तथा अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

        नेशनल लोक अदालत में 35 खण्डपीठों के द्वारा मोटर दुर्घटना के 47 प्रकरणों में 19596724/-रूपये एवं चेक वाउन्स के 286 प्रकरणों में 64908418/- रूपये, विद्युत अधिनियम के 70 प्रकरणो में 1250801/- रूपये की अवार्ड पारित किये गये तथा अन्य सिविल प्रकृति के 36 प्रकरणो में 5109747/- रूपये के अवार्ड पारित किये गये, इसी प्रकार अन्य प्रकृति के 73 प्रक्ररणांे में 10029920/- तथा राजीनामा योग्य दांडिक प्रकरण 145 पारिवारिक विवाद के 124 प्रकरण, तथा यातायत चालान के 126 प्रक्ररण सभी प्रकार के लंबित कुल 909  प्रक्ररण आपसी सुलह समझौते के आधार पर निराकृत हुए जिनमें 102627110/- रूपये के अवॉर्ड राशि के आदेश पारित किये गये।

           इसी प्रकार प्रिलिटिगेशन प्रकरणों में बैंक बकाया वसूली के 20 प्रकरणों में 1285950/- नगर निगम/नगरपालिका के जलकर के 232 प्रकरणों में 1180512/- एवं विद्युत विभाग के प्रिलिटिगेशन के 553 प्रकरणों में 4906385/- इस प्रक्रार कुल 1033 प्र्रकरण आपसी राजीरामा के अधार पर निराकृत हुए जिनमें  10133557/-रूपये के अवॉर्ड राशि के आदेश पारित किये गये।

उक्त नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशांत हुद्दार के द्वारा प्रातः 10ः30 बजे दीप प्रज्वलित कर किया गया इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश सुधीर मिश्रा सहित समस्त न्यायाधीशगण एवं जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजकुमार मिश्रा एवं अधिवक्ता संघ के समस्त कार्यकारिणी, न्यायालय के कर्मचारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहें।

         जिला विधिक सेवा प्राधिकरण छिन्दवाड़ा के सचिव/न्यायाधी राकेश सिंह ने सफल नेशनल लोक अदालत के आयोजन पर समस्त माननीय न्यायाधीशगणों , अधिवक्तागणों का एवं समस्त विभागों के अधिकारियों तथा पक्षकारों का आभार व्यक्त किया।

श्रीलंका में वैदिक वृष्टि विज्ञान और AI के समन्वय पर डॉ. राजनाथ झा को मिला अंतरराष्ट्रीय ‘प्रोफेसर अवार्ड-2026

*भारतीय ज्ञान परंपरा का ऐतिहासिक परचम* 


*न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

श्रीलंका

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करते हुए पटना स्थित ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. राजनाथ झा को श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में ‘प्रोफेसर अवार्ड-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके शोध-वक्तव्य “भारतीय ज्योतिष शास्त्र में वृष्टि विज्ञान और वर्तमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)” के लिए प्रदान किया गया।

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंटरनेशनल ज्योतिष वैदिक फेडरेशन (IVAF), U.S.A. के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें भारत सहित अमेरिका, यूरोप, नेपाल, मॉरीशस और श्रीलंका के विद्वानों, शोधार्थियों तथा वैदिक अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

अपने शोध-पत्र में डॉ. राजनाथ झा ने भारतीय ज्योतिष परंपरा में वर्णित वृष्टि-विज्ञान, मेघ-गर्भ लक्षण, खगोलीय स्थितियों, वायु-दिशाओं तथा प्राकृतिक संकेतों की चर्चा करते हुए इनके अध्ययन की आधुनिक डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के साथ संभावित समन्वय पर अपना शोध प्रस्तुत किया।

उन्होंने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में सुरक्षित प्राकृतिक एवं मौसमी संकेतों का आधुनिक मौसम संबंधी आंकड़ों, उपग्रह चित्रों और कंप्यूटर आधारित विश्लेषण के साथ तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो वर्षा, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और मौसमीय परिवर्तनों के पूर्वानुमान के नए शोध-द्वार खुल सकते हैं।

डॉ. झा ने अपने प्रस्तुतीकरण में वराहमिहिर सहित भारतीय ज्योतिष परंपरा के ग्रंथों में वर्णित प्राकृतिक संकेतों और आधुनिक तकनीकी विश्लेषण के बीच संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अतीत की विरासत के रूप में देखने के बजाय आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों के साथ जोड़कर उसके वैज्ञानिक पक्षों का पुनः परीक्षण किया जाना चाहिए।

सम्मेलन की अध्यक्षता श्रीलंका के प्रतिष्ठित पेराडेनिया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. वेन. जम्बुगहपिटिये धम्मलोक ने की। उन्होंने डॉ. राजनाथ झा को सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया।

इस अवसर पर इंटरनेशनल ज्योतिष वैदिक फेडरेशन की चेयरमैन दिव्या पिलई, एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. मनीष पाण्डेय सहित विभिन्न देशों से आए विद्वान एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

डॉ. झा के शोध-वक्तव्य में भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संभावित संवाद को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक संदर्भों में अध्ययन और पुनर्व्याख्या की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किए।

श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय मंच पर डॉ. राजनाथ झा को मिला यह सम्मान बिहार सहित भारतीय ज्योतिष, संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े अकादमिक जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

उनका यह शोध-विषय इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि परंपरागत भारतीय ज्ञान और आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच संवाद स्थापित कर प्राकृतिक घटनाओं के अध्ययन की नई संभावनाओं पर विमर्श आगे बढ़ाया जा सकता है।

डॉ. राजनाथ झा का सम्मान भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

आदिवासी छात्रों का भविष्य लील गई प्राचार्य की तानाशाही, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा में एक भी पंजीयन नही, अंतिम तिथि खत्म

* बड़ी तुम्मी विद्यालय का मामला, प्राचार्य पर कार्यवाही की मांग*


अनूपपुर

आदिवासी विकासखंड पुष्पराजगढ़ के आदिवासी अंचल स्थित शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ी तुम्मी में प्राचार्य की तानाशाही ने कक्षा 8वीं के 12 गरीब आदिवासी छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।

राज्य शिक्षा केंद्र की महत्वपूर्ण योजना राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा 2026-27 जो कक्षा 8वीं के छात्रों के लिए आयोजित की जानी थी, उसमें बड़ी तुम्मी विद्यालय में अध्ययनरत 12 छात्रों का पंजीयन होना था, लेकिन पंजीयन न होने के कारण इन सभी छात्रों के भविष्य में अंधकार के बादल छा गए हैं। यह योजना चयनित गरीब छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति देती है।

विकासखंड स्रोत समन्वयक हर प्रसाद तिवारी द्वारा 22 अगस्त 2026 को जारी प्रगति प्रतिवेदन के अनुसार पडमनिया संकुल के 10 विद्यालयों ने जहाँ शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया है, वहीं बड़ी तुम्मी में 12 छात्रों के लक्ष्य के विरुद्ध एक भी पंजीयन नहीं हुआ और अब अंतिम तिथि समाप्त होने से पंजीयन की कोई संभावना नहीं बची है।

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्रतियोगिता परीक्षा में छात्रों के पंजीयन की जिम्मेदारी संबंधित प्राचार्य के पासवर्ड लॉगिन से होनी थी, किन्तु आदिवासी छात्रों को सबक सिखाने के लिए बैठे प्राचार्य ने छात्रों का पंजीयन न कर राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा में सिर्फ उन्हें बाहर का रास्ता नहीं दिखाया अपितु इन छात्रों के सुनहरे भविष्य में कील ठोंक कर उन्हें गरीबी और कंगाली की ओर ढकेल दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि गत वर्ष भी प्राचार्य ने एक भी पंजीयन नहीं कराया था जिसकी शिकायत आयुक्त शहडोल संभाग और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में हुई थी लेकिन शिक्षा विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की। कार्यवाही न होने से प्राचार्य के हौसले बुलंद हैं और इस वर्ष भी वही लापरवाही दोहराई गई।

अब पालकों का साफ कहना है कि इस घोर लापरवाही के लिए प्राचार्य पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग क्या करेगा, क्योंकि पिछले साल कार्यवाही न होने के कारण ही छात्रों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लगातार दो साल से आदिवासी छात्रों को प्राचार्य की तानाशाही की कीमत चुकानी पड़ रही है। न जाने इतनी महत्वपूर्ण शासन की योजना में लापरवाही बरतने के बावजूद जिले के आला अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारी एक प्राचार्य के सामने बौने साबित हो रहे हैं।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget