दबंग पब्लिक प्रवक्ता

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ग्रेनाइट खदान में हुआ दर्दनाक हादसा, अनूपपुर के 2 मजदूर की हुई मौत, कई घायल, सीएम ने दिए जॉच के आदेश

*मृतकों को 10 व घायलों को 5 लाख देने की घोषणा*

​अनूपपुर

कर्नाटक प्रांत की एक ग्रेनाइट खदान में चट्टान धंसने से हुई आकस्मिक हृदयविदारक दुर्घटना में अनूपपुर जिले के 2 श्रमिकों के असामयिक निधन पर जिला प्रशासन ने गहरा शोक व चिंता व्यक्त की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्घटना में जनपद पंचायत जैतहरी के ग्राम पंचायत सेमरवार (वार्ड नंबर 9) निवासी 36 वर्षीय श्री भुवनेश्वर सिंह गोंड एवं ग्राम पंचायत सिंधौरा निवासी 22 वर्षीय श्री राजेश कुमार चौधरी दुर्घटना में  प्रभावित हुए है। 

​उक्त घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। दोनों दिवंगतो के पार्थिव देह को पूर्ण ससम्मान और सुरक्षित रूप से उनके गृह ग्राम वापस लाने तथा दुर्घटना से प्रभावित छोटेलाल एवं गुलाब सिंह के समुचित इलाज व देखभाल के लिए तत्परता से प्रयास किए जा रहे हैं। घायलों की स्थिति सामान्य बताई गई है। कलेक्टर अनूपपुर कर्नाटक के स्थानीय प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों से निरंतर संपर्क रखकर समन्वय सुनिश्चित करें। उन्होंने आश्वस्त किया है कि दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीरों को शीघ्र गृह जिला लाने और घायल श्रमिकों को हर संभव चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं प्राथमिकता के साथ पूरी की जा रही हैं।

खदान में लगभग 16 मजदूर कार्य कर रहे थे। इसी दौरान करीब 40 फीट ऊंचाई से एक विशाल ग्रेनाइट चट्टान अचानक नीचे आ गिरी। चट्टान की चपेट में आने से कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर मौजूद लोडिंग वाहन और ट्रैक्टर भी चट्टान की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मृतकों और घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया। घायलों के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 

डीआईजी एस. गिरीश के अनुसार, खदान के ऊपरी और निचले हिस्से में दो क्रेशर संचालित हो रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग के दौरान विशाल ग्रेनाइट चट्टान खिसककर नीचे गिर गई, जिससे नीचे कार्य कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे में पांच मजदूर घायल हुए, जबकि चार मजदूर सुरक्षित बच निकले।

हादसे के बाद कर्नाटक सरकार हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि चट्टान खिसकने अथवा मिट्टी धंसने के कारण हुआ है। वहीं, मंत्री प्रियंक खड़गे ने प्रथम दृष्टया लापरवाही की आशंका जताते हुए खान एवं भूविज्ञान विभाग तथा गृह विभाग को संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने खदान को अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने के आदेश दिए हैं। दुर्घटना में घायल जिले के अन्य दो श्रमिक की स्थिति सामान्य उपचार उपरांत किए गए डिस्चार्ज 

खदान संचालक ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है।

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बिना तिरपाल कोयला परिवहन पर बढ़ी चिंता, सड़कों पर गिर रहे कोयले से बढ़ रहा हादसों और प्रदूषण का खतरा

अनूपपुर

कोतमा क्षेत्र के एसईसीएल के बिजुरी हसदेव क्षेत्र अंतर्गत कुरजा खदान से होने वाले कोयला परिवहन को लेकर स्थानीय नागरिकों, वाहन चालकों एवं श्रमिकों के बीच चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अनेक अवसरों पर कोयला लदे ट्रक एवं डंपर बिना तिरपाल अथवा पूरी तरह ढंके बिना मुख्य मार्गों से गुजरते दिखाई देते हैं। इससे सड़क पर कोयले के बड़े-बड़े टुकड़े गिरने तथा कोल डस्ट फैलने की समस्या लगातार बनी हुई है, जिसका असर आम नागरिकों की सुरक्षा, पर्यावरण और यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।

कोयले का परिवहन तिरपाल से पूरी तरह ढंककर किया जाना चाहिए, ताकि धूल प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जा सके और सड़क पर कोयला गिरने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। उनका कहना है कि यदि इन नियमों का पूरी गंभीरता से पालन नहीं किया जाता तो इसका सीधा प्रभाव आमजन के स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण पर पड़ता है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार मुख्य मार्गों पर कई बार बड़े-बड़े कोयले के टुकड़े गिर जाते हैं। ऐसे में विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों को अचानक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। लोगों का कहना है कि यदि तेज गति से गुजर रहे किसी वाहन का पहिया इन टुकड़ों पर चढ़ जाए तो गंभीर सड़क दुर्घटना हो सकती है। 

सड़क पर गिरा कोयला वाहनों के लगातार आवागमन से बारीक कोल डस्ट में बदल जाता है, जो पूरे मार्ग में उड़ता रहता है। इससे आसपास के रहवासी, राहगीर, दुकानदार तथा प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले लोग धूल प्रदूषण से प्रभावित होते हैं। लोगों का कहना है कि नियमित पानी का छिड़काव, सड़क की समय-समय पर सफाई तथा तिरपाल के अनिवार्य उपयोग से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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बेदखली आदेश के बाद भी नहीं रुका निर्माण, अब एसईसीएल महाप्रबंधक प्रभाकर राम त्रिपाठी की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अनूपपुर 

कोतमा क्षेत्र की सार्वजनिक भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, एसईसीएल द्वारा सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत संबंधित स्थल को खाली कराने तथा कथित अवैध निर्माण हटाने का आदेश जारी किए जाने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य जारी रहने की चर्चा है। इस स्थिति ने आदेश के पालन और कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर स्थानीय स्तर पर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि संबंधित प्रकरण में विभाग की ओर से सार्वजनिक सूचना जारी कर अतिक्रमण हटाने एवं निर्माण ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद यदि निर्माण गतिविधियां जारी हैं, तो स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आदेश का पालन समयबद्ध तरीके से क्यों नहीं कराया गया। उनका मानना है कि किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश केवल अभिलेखों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी प्रभावी रूप से लागू होना चाहिए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में कानून का समान रूप से पालन होना आवश्यक है। यदि किसी प्रकरण में बेदखली एवं ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हो चुका है, तो उसके अनुपालन में विलंब स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े करता है। लोगों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। अब स्थानीय लोगों की निगाहें एसईसीएल के महाप्रबंधक प्रभाकर राम त्रिपाठी की ओर हैं। 

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सेफ क्लिक 2.0' अभियान, ग्राम पंचायतों में लगी साइबर चौपाल, ग्रामीणों को बताए ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपाय

उमरिया

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों से नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन अनुसार  "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान के तहत उमरिया पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा की मार्गदर्शन पर उमरिया कोतवाली थाना प्रभारी मदनलाल मरावी की उपस्थिति में उमरिया ग्राम पंचायत चंदवार में साइबर चौपाल आयोजित की गई।अभियान के पांचवें दिवस ग्रामीणों को ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

साइबर चौपाल के दौरान उमरिया पुलिस कोतवाली थाना प्रभारी मदनलाल मरावी ने फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, ओटीपी फ्रॉड, यूपीआई फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, निवेश एवं टास्क फ्रॉड जैसे तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बारे में जागरूक किया। साथ ही सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग जानकारी या ओटीपी साझा न करने तथा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी। ग्रामीणों को बताया गया कि साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल  साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें, साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, संबंधित बैंक को तुरंत सूचना देकर खाता या यूपीआई ब्लॉक कराएं तथा स्क्रीनशॉट, कॉल रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन आईडी जैसे डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें।उमरिया पुलिस ने अभियान के माध्यम से ग्राम स्तर तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाते हुए नागरिकों से सतर्क और जागरूक डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील की। पुलिस का उद्देश्य जिले के प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाकर सुरक्षित एवं सशक्त डिजिटल समाज का निर्माण करना है। 

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सचिव परेशान सरपंच व पंचो ने प्रभारी मंत्री से लगायी तबादले की गुहार,  शिकायतो का नहीं हुआ समाधान

उमरिया

जन कल्याण शिविर अमिलिहा में उमरिया जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान को बेली ग्राम पंचायत की आदिवासी महिला सरपंच श्रीमती केमली बाई ने पंचो सहित उपस्थित होकर सचिव के मनमानी कार्य शैली, अनियमितताओं, और शासकीय धन राशि के अपव्यय की राम कहानी सुनाई, साथ ही मय पंचो के एक आवेदन पत्र देकर तबादले की मांग की थी, जिस पर प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर उमरिया को आवेदन देते हुए निर्देश दिए गए थे कि तत्काल इस सचिव को अटैच करते हुए अन्य को प्रभार दे, लेकिन जन कल्याण शिविर संपन हुए एक पखवाड़ा व्यतीत हो गयें, प्रभारी मंत्री के निर्देश का पालन करना कलेक्टर उमरिया ने उचित नहीं समझा।

ध्यान देने योग्य है कि  12 पंचीय बेली ग्राम पंचायत सचिव की कार्य प्रणाली से तंग सरपंच, उप सरपंच सहित 10 लोगों ने उपस्थित होकर जन कल्याण शिविर में कलेक्टर उमरिया और प्रभारी मंत्री के समक्ष शिकायत दर्ज करायी गयी थी फिर भी न जाने की प्रशासनिक व्यवस्था में ग्राम पंचायत सचिव को हटाने में इतनी बड़ी क्या बाधा उत्पन्न हो रही है कि जन कल्याण शिविर की मंशा पर पानी फेरते हुए सरपंच की मांग और प्रभारी मंत्री के निर्देश सभी को धत्ता बताते हुए सचिव को अभय कर दिया गया है। बताया जाता है की जन कल्याण शिविर में उठी इस मांग पर अब तक न जांच प्रक्रिया शुरू हुई और ना ही सचिव को वहाँ से हटाया गया। 

*सचिव ने शिकायतकर्ताओं को दी धमकी* 

बेली ग्राम पंचायत के सचिव ने अपना तांडव शुरू कर दिया है। बताया जाता है वह शिकायत कर्ताओं को झूठे आरोपों में फंसाने की खुली धमकी देते हुए कहा कि आप मेरी शिकायत करते हो मैं आपके विरूद्ध मान हानि के मामले के साथ ऐसे मामले में फंसाऊगा की कोई भी बचा नहीं सकता। सचिव के इस धमकी से ग्राम पंचायत में और ही असंतोष के श्वर मुखर हो गयें है। बताया जाता है कि बेली में पदस्थ यही सचिव इसके पहले इसी जनपद के गोयरा ग्राम पंचायत में शासकीय धन राशि के आरोप में लगभग एक वर्ष से ज्यादा समय तक निलंबित रहे हैं।

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भालू के हमले से किसान की हुई मौत, मवेशी चराने के दौरान हुई घटना, 7 दिन में दूसरी घटना

शहडोल

जिले में भालू के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक सप्ताह के भीतर भालू के हमले में दूसरी मौत का मामला सामने आया है। ताजा घटना खनौधी वन परिक्षेत्र के मुर्गा महरोई गांव की है, जहां खेत में मवेशी चरा रहे एक किसान पर भालू ने हमला कर दिया। घटना में किसान की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, महरोई निवासी 52 वर्षीय किसान गुरुवार को घर से मवेशी चराने निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की। शुक्रवार सुबह उसका शव खेत में मिला। शव पर मिले चोट के निशानों के आधार पर प्रारंभिक तौर पर भालू के हमले से मौत की आशंका जताई जा रही है। पोस्टमॉर्टम और वन विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद मौत के कारण की पुष्टि होगी।

घटना बस्ती से लगे खेत में होने के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब खेतों में जाने से भी डर लग रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने, भालू की निगरानी करने और गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क करने की मांग की है।

इससे पहले गोहपारू वन परिक्षेत्र के धनवाह गांव में जंगल से लकड़ी लेने गए एक 55 वर्षीय व्यक्ति पर भी भालू ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। लगातार दूसरी घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस और वन विभाग मामले की जांच में जुटे हैं।

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ठेकेदार की लापरवाही, सीवर-गैस पाइपलाइन बना मुसीबत, गड्ढों में फंस रहे वाहन, राहगीर हो रहे हैं परेशान

शहडोल

शहर में सीवर लाइन और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए चल रहे निर्माण कार्य के कारण आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। शहर की कई प्रमुख सड़कें और मोहल्लों की गलियां खुदाई के बाद बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। निर्माण एजेंसियों द्वारा पाइपलाइन डालने के बाद गड्ढों को केवल मिट्टी डालकर भर दिया गया, लेकिन लगातार हो रही बारिश से यह मिट्टी धंस गई है। इससे सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें आए दिन वाहन फंस रहे हैं और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के अधिकांश वार्डों और गलियों में यही स्थिति बनी हुई है। सड़कें कहीं उखड़ी हुई हैं तो कहीं कीचड़ और जलभराव के कारण पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहन चालक गड्ढों का अनुमान नहीं लगा पाते और हादसे का शिकार होते-होते बचते हैं।

बारिश के बीच कमिश्नर बंगले के सामने सड़क धंसने से एक कार गड्ढे में फंस गई। वाहन को बाहर निकालने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसी तरह पुलिस लाइन जाने वाले मार्ग पर एक निजी स्कूल के सामने जलभराव के बीच सड़क धंस जाने से एक स्कॉर्पियो वाहन भी गड्ढे में फंस गया। घटना के कारण कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा और लोगों की भीड़ लग गई।

रहवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सड़कों का स्थायी रूप से पुनर्निर्माण नहीं किया जा रहा। केवल औपचारिक रूप से मिट्टी डालकर काम पूरा मान लिया जाता है, जबकि बारिश शुरू होते ही सड़कें फिर धंस जाती हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

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घर में घुसकर चाकू से हमला करने वाले आरोपी की जमानत निरस्त

अनूपपुर

अनिल नायक पिता सतीष नायक  उम्र 27 वर्ष निवासी घनश्याम नगर, रायपुर (छ0ग0) अन्य आरोपियो के साथ अधिवक्ता रामपाल परस्ते निवासी लमसरई राजेन्द्रग्राम के घर में घुसे और उसके साथ गाली गलौज करते हुये उसके साथ मारपीट किये और चाकू से हमला कर उपहति कारित किये हैं। अपराध के संबंध में फरियादी अधिवक्ता रामपाल परस्ते ने थाना करपठार में एफ आई आर दर्ज करायी । उक्त अपराध के संबंध में थाना करनपठार में अपराध क्रमांक 123/2026 धारा 296, 118(1), 118(2), 331(6), 351(3), 3(5) भारतीय न्याय संहिता, 2023 ,वं धारा 3(2)(ट), 3(2)(ट-ं), 3(2)(त्) अनुसूचित जाति ,वं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 पंजीकृत किया गया और आरोपियों की गिरफतार कर जेल भेज दिया गया। मामले में आरोपियो की ओर से माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल के न्यायालय में जमानत पर छोड़े जाने हेतु याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए और शासन की ओर से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा द्वारा रखे गए तर्कों और बहस तथा मामले की गम्भीरता एवं परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी अनिल नायक की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। आरोपी वर्तमान में जिला जेल अनूपपुर में 15 मई 2026 से निरुद्ध है ।                                                                                                                                    

ग्रेनाइट खदान में हुआ दर्दनाक हादसा, 5 मजदूरों समेत 7 की मौत, 5 घायल, सीएम ने दिए जॉच के आदेश

*मृतकों को 10 व घायलों को 5 लाख देने की घोषणा*


अनूपपुर 

कर्नाटक के बेंगलुरु के मदापट्टना स्थित एक ग्रेनाइट क्रेशर खदान में गुरुवार को हुए भीषण हादसे में मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के पांच मजदूरों सहित कुल सात श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक श्रमिक छत्तीसगढ़ तथा एक कर्नाटक के यादगीर जिले का निवासी था। हादसे के बाद पूरे अनूपपुर जिले में शोक की लहर फैल गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को खदान में लगभग 16 मजदूर कार्य कर रहे थे। इसी दौरान करीब 40 फीट ऊंचाई से एक विशाल ग्रेनाइट चट्टान अचानक नीचे आ गिरी। चट्टान की चपेट में आने से कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर मौजूद लोडिंग वाहन और ट्रैक्टर भी चट्टान की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मृतकों और घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया। घायलों के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सेंट्रल रेंज के डीआईजी एस. गिरीश ने मध्यप्रदेश के पांच मजदूरों की मौत की पुष्टि की है।

डीआईजी एस. गिरीश के अनुसार, खदान के ऊपरी और निचले हिस्से में दो क्रेशर संचालित हो रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग के दौरान विशाल ग्रेनाइट चट्टान खिसककर नीचे गिर गई, जिससे नीचे कार्य कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे में पांच मजदूर घायल हुए, जबकि चार मजदूर सुरक्षित बच निकले।

हादसे के बाद कर्नाटक सरकार हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि चट्टान खिसकने अथवा मिट्टी धंसने के कारण हुआ है। वहीं, मंत्री प्रियंक खड़गे ने प्रथम दृष्टया लापरवाही की आशंका जताते हुए खान एवं भूविज्ञान विभाग तथा गृह विभाग को संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने खदान को अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने के आदेश दिए हैं।

खदान संचालक ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है।

जैतहरी थाना क्षेत्र के थाना प्रभारी के अनुसार, मृतकों में भुवनेश्वर सिंह गौंड, राजपाल सिंह (35), रामअवतार सिंह (31) और राजेश प्रसाद चौधरी (28) की पहचान हो चुकी है, जबकि एक अन्य मृतक की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है। मृतक जैतहरी थाना क्षेत्र के सिंघोरा, सेमरवार और चोलना सहित आसपास के गांवों के निवासी बताए गए हैं।

वहीं, घायलों में गुलाब सिंह (27), राजपाल सिंह (30) और छोटू लाल सहित कुल पांच मजदूर शामिल हैं, जिनका इलाज जारी है। प्रशासन द्वारा सभी पीड़ितों के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर खदानों में सुरक्षा मानकों और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

शिकार के लिए लगाए गए करंट की चपेट में आये 2 युवक, 1 की हुई मौत, 1 घायल अस्पताल में भर्ती


शहडोल

जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र के साखी गांव के पास जंगल में जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए करंट की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद लोगों ने दोनों युवकों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने एक युवक को मृत घोषित कर दिया। वहीं दूसरे का इलाज जारी है।

पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान साखी निवासी प्रिंस लोनी (19) पुत्र सूरज लोनी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि प्रिंस अपने एक साथी के साथ घर से निकला था। दोनों जब गांव के पास जंगल वाले क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी वहां जंगली जानवरों के शिकार के उद्देश्य से अवैध रूप से बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगते ही दोनों युवक गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिजली के संपर्क से दोनों को अलग कर तत्काल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में उपचार के दौरान प्रिंस ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे युवक का इलाज जारी है। उसकी हालत पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है।

सूचना मिलने पर ब्यौहारी थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले में मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी गई है। दोषियों की पहचान के लिए आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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