दबंग पब्लिक प्रवक्ता

पेड़ पर चढ़कर ई-अटेंडेंस लगाने को मजबूर हुई एएनएम, वायरल वीडियो ने खोली नेटवर्क व्यवस्था की पोल


अनूपपुर

डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों के बीच अनूपपुर जिले के आदिवासी अंचल पुष्पराजगढ़ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। यहां एक महिला एएनएम को अपनी ऑनलाइन उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार मामला पुष्पराजगढ़ विकासखंड के सेक्टर दामेहड़ी अंतर्गत गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र का है। बताया जा रहा है कि विभागीय निर्देशों के तहत कर्मचारियों को निर्धारित समय पर मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी होती है। लेकिन स्वास्थ्य केंद्र परिसर में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण एएनएम को मजबूरी में पेड़ पर चढ़कर नेटवर्क तलाशना पड़ा, जिसके बाद वह अपनी ई-अटेंडेंस दर्ज कर सकीं।

वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था और दूरस्थ क्षेत्रों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, तब कर्मचारियों से हर हाल में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की अपेक्षा करना व्यवहारिक नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि गन्नागोडा सहित आसपास के कई गांव लंबे समय से कमजोर मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। इसका असर केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग और अन्य सरकारी सेवाओं पर भी पड़ता है। लोगों ने प्रशासन और दूरसंचार कंपनियों से क्षेत्र में नेटवर्क व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है।


संदिग्ध अवस्था मे मिला युवक का शव, शरीर पर मिले चोट के निशान, पुलिस जांच में जुटी


 अनूपपुर 

जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के सोन मौहरी गांव में एक 36 वर्षीय युवक की संदिग्ध हालात में शव मिला है। मृतक की पहचान अशोक सिंह गोंड के रूप में हुई है, जिसका शव गांव के ही एक नाले के समीप पड़ा हुआ मिला। घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने 108 एंबुलेंस की मदद से युवक को तुरंत जिला अस्पताल भिजवाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर ने बताया कि मृतक के शरीर पर, विशेषकर गले और छाती पर, गंभीर चोटों के निशान स्पष्ट रूप से देखे गए हैं। इसके अतिरिक्त उसके फेफड़ों में भी गहरे जख्म पाए गए हैं, जो घटना को और भी संदिग्ध बनाते हैं। पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी की और परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव उन्हें अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया।

पुलिस को परिजनों ने बताया कि अशोक को शराब पीने की बुरी लत थी। वह अपने घर से निकलकर करीब एक किलोमीटर दूर स्थित किसी दूसरे मोहल्ले में गया हुआ था। देर रात कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने उसे नाले के पास बेसुध हालत में देखा और इसकी सूचना उसके परिवार वालों को दी थी। पुलिस अब इस पूरी गुत्थी को सुलझाने में जुट गई है कि आखिर युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके शरीर पर यह घातक चोटें कैसे आईं।

श्रावण के प्रथम दिवस पर शिवमय हुआ अमरकंटक, "बोल बम" के जयघोष से गूंज उठी तपोभूमि


अनूपपुर

पावन श्रावण मास के प्रथम दिवस से ही विश्व प्रसिद्ध तीर्थ एवं तपोभूमि अमरकंटक भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर हो उठा है। मां नर्मदा की पावन नगरी इन दिनों "बोल बम", "हर-हर महादेव" और "जय भोले" के जयघोष से गुंजायमान है। केसरिया वस्त्र धारण किए हजारों शिवभक्त मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर पहुंचकर पवित्र जल अपने कांवड़ में भर रहे हैं और विभिन्न शिवधामों की ओर अपनी कठिन पदयात्रा प्रारंभ कर रहे हैं। संपूर्ण अमरकंटक क्षेत्र श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति के दिव्य रंग में रंगा दिखाई दे रहा है।

श्रावण मास के साथ ही छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांवड़िये अमरकंटक पहुंच रहे हैं। यहां से मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर वे लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित विख्यात भोरमदेव महादेव में जलाभिषेक करने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं। वहीं बिलासपुर एवं आसपास के श्रद्धालु मां नर्मदा का जल लेकर रतनपुर स्थित भगवान शिव का अभिषेक करने निकल रहे हैं, जबकि शहडोल अंचल के कांवड़िये अमोलेश्वर धाम पहुंचते हैं तथा भगवान्  भोलेनाथ को जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।

अमरकंटक पहुंचने वाले श्रद्धालु सर्वप्रथम मां नर्मदा उद्गम मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके बाद वे मां नर्मदा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं मंगलमय जीवन का संकल्प लेते हैं। श्रद्धालु अमरेश्वर महादेव तथा जालेश्वर महादेव सहित अन्य प्राचीन शिवालयों में दर्शन-पूजन कर अपनी यात्रा का शुभारंभ करते हैं। मंदिरों में गूंजते वैदिक मंत्र, घंटियों की मधुर ध्वनि झांझ, मजीरा और ढोलक - मांदल की थाप और शिवभक्तों के जयघोष से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठ रहा है।

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